एक साल और बीत गया…
कुछ यादें हसीं, कुछ दर्द दे गया
कुछ बातें मीठी सी , और कुछ सबक दे गया ..
जब जब दर्द का बादल छाया,
जब जब गम का साया लहराया
तब मेरा दिल थोड़ा घबराया,
तब तब हाथों में तुम्हारा हाथ पाया
मेरे दिल की किताब में, मैंने तुझे सजाया
मेरी हर याद में, मैंने तुझको बसाया
मेरी हर फ़रियाद में, बस तेरा नाम आया
दिन में रात में, बस तेरा ख्याल आया
धुप में बरसात में, सामने तुझे पाया
ख़ुशी में गम में,तूने साथ निभाया
एक दूजे के लिए, अपने आप को ढलाया
वक़्त के साथ जिसने प्यार को और बढ़ाया
कुछ नए रिश्तो ने आकार लिए,
जन्मों की प्रीत साकार हुई
बिदाई की रीत है ऐसी,
ये सोच के ही आँखे नम बार-बार हुई
वो फिट होने का जूनून सर चढ़ के बोलना,
जिम में जाके दिन रात दौड़ना,
जंक फ़ूड देखके अपने आप को बोलना,
फिट होने तक मन को नहीं है डोलना
समुंदर का किनारा और,
मखमली रेत का फिसलना
नीले पानी का शोर,
और भीगे पैरों का थिरकना
एक साल और बीत गया…
कुछ यादें हसीं, कुछ दर्द दे गया
कुछ बातें मीठी सी , और कुछ सबक दे गया ..
अपनों से दूर होने का अहसास, बहुत्त कुछ सीखा गया,
ये साल अपनों को और करीब ला गया...
