Saturday, August 1, 2015

Festival of Lights ..!!

Its been an year and a half I got married to my best friend. The journey since then is very exciting and memorable, full of surprises and sweet memories.

Last year I celebrated Diwali with my new family for the first time. I thoroughly enjoyed the festival and of-course the love I was showered  with. I would say that Diwali was dedicated to bonding. Diwali brought me closer with my new family and bond of affection grew stronger among us. That Diwali will always be the most special Diwali for me.




 दीपों का त्यौहार मनाया अलग तरह से इस बार..
पाया मम्मीजी पापा जी का खूब सारा दुलार..

रंगो से रंगोली ने लिया खुशियों का आकार..
जले ख़ुशियों के दीप और सपना हुआ साकार..

फोड़े खूब पटाखे और लडियाँ..
ऐसा लगा कभी ख़त्म ना हो ये घड़ियाँ..

धूम धाम थी बाज़ारो मे..
रौनक थी झवर चौबारो मे..

जीजी के हाथ का पूए का साग..
खा के हो गया मान बाग बाग..

मम्मीजी का वो सेठानी वाला अंदाज़..
बिल बढ़ाए फोन का वो मिलनसार मिज़ाज़..

पापा जी का मन तो बार बार दुकान मे ही जाए..
सेठ जी वाला रोब तो अब कभी छूट ना पाए..

श्रुति दीदी के छोटे छोटे नखरे..
सब उठाए प्यार से और किसी को ना अखरे..

निक्की के नये बिज़्नेस आइडियास की बात..
करे परेशान पापा जी को दिन रात..

मनासा के समोसे बहुत याद आएँगे..
रामदयाल जी के गुलाब जामुन तो मोटापा बढ़ाएँगे..

राबड़ी और जलेबी का तो अलग ही खेल है..
लेकिन मम्मी के हाथ के खाने के आगे बाकी सब फैल है..

दीपो का त्योहार मनाया अलग तरह से इस बार..
यू ही दीवाली मनाए हम साथ साथ हर बार..

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