Saturday, August 1, 2015

Farewell poem for my Friend..!!

I wrote this poem long back for one of my very close friend.
We met in Netherlands during my onsite assignment and became very close friends in just one year.
I still cherish the moments we spent together. Those days will always be close to my heart.

I recite this poem on her farewell and made a promise to be friends for life time...
This is for you  my Pilloo... :)






 जीवन भर का साझा हो , या दो पल की हो बात ;
जितना किस्मत मे लिखा , उतना होता साथ .

माना कल नहीं  होंगे ये चेहरे,
पर रिश्ते जिनको कहते है , वो तो है सागर गहरे .

जब जब हमने बाँटा था , अपना सुख दुख प्यार ;
तब-तब जीवन बन पड़ा , खुशियों का त्योहार .

तोड़ के सारे बंधन , जोड़ के दिल के तार ;
एक बरस मे ही भर लए , जीवन के रंग हज़ार.

जाने की है अब घड़ी, देना है ये संदेश ;
जो हो अपना उससे , कभी ना रखना द्वेष.

मिलेंगे जब भी राह मे , यादों का होगा कारवा ;
नामी होगी इन आँखो मे , पर झूमेगा मान बावरा .

ये है अपना गुलशन , अपनी इससे है शान ;
दोस्त सदा बढ़ते रहना , अपनी दोस्ती का मान.

और कभी ना भूलना , कुदरत का ये उसूल ;
भले ही  डाल से टूट गया, पर खुशबू देता फूल....
भले ही  डाल से टूट गया, पर खुशबू देता फूल.... 

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